
काला काला मंदिर काली काली चुनरी,
काला काला तेरा शरीर,
कालका आण बंधाईए धीर,
तेरे भक्त ने तेरी जोत प,
पड़या बहावणा नीर,
तेरी जोत प संकट खेलः,
जगा दिए री तकदीर,
एक हाथ में खपर लेरी,
दुजे में समसीर,
तेरा काली भोग लगाऊं,
समसाणां मेंं बणा खीर,
संकट बैरी बुबकारः,
मेरःलगं कसुते री तीर,
अंगारी प छीटा दे दिया,
या स भेठ अखीर,
दरबारां मेंं अकड़या भेठया,
रेवाड़ी का हीर,
आज तलक तन्नै काटी स,
सदा संकट की जंजीर,
पान और पेड़ा लौंग सुपारी,
दयूंगा सिर का चीर,
अशोट भक्त प हाथ धरया,
तन्नै करया भक्ति में शीर,
भोग लिए बिना आवः,
ना मैं जाणु तेरी तासीर,
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