
काली काली तु कलकत्ते वाली,
तेरी अखियां लाल लाल है
तेरे गल मुण्डन की माल है
तूने कहा था मैं जम्मू में मिलूंगी,
मैं आई तू न आई
मेरे प्यासे नैना तरसे, तू निकली न भवन से
काली काली.............,
तेरी अखियां.........
तेरे गल ................
तूने कहा था कलकत्ते में मिलूंगी
मेरे प्यासे नैना तरसे तू नि
निकली न भवन से
तुने कहा था नैना देवी में मिलूंगी
तुने कहा था मनसा देवी में मिलूंगी
तुने कहा था वै वैष्णो देवी में मिलूंगी
मैं आईतू न आई
तुने कहा था चिन्तापूर्णी में मिलूंगी
तुमम तूने कहा था ज्वाला देवी में मिलूंगी
रोटे गल मुण्डन के माल है
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