
कालों के काल महाकाल,
को मनाएंगे,
उज्जैन नगरी में,
शीश झुकाएंगे।।
भांग धतूरा का,
भोग लगाते है,
बिल्वपत्ती जिनके,
सिर पर चढ़ाते हैं,
दूध दही से,
स्नान कर आएंगे,
शीश पर चंदा जिनकी,
जटा में गंगा,
गले में नाग जिनके,
देखो भुजंगा,
दर्शन करने को,
उज्जैन नगरी जाएंगे,
भस्म में लगाए भोला,
डमरू बजाए,
डमरू बजाए भोला,
डमरू की ताल पर,
वो सबको नचाएंगे,
गायक / प्रेषक – धर्मेंद्र राजपूत।
संपर्क – 7049440533
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