
कुछ ऐसा जतन कर कान्हा...
कुछ ऐसा जतन कर कान्हा मै तेरी हो जाऊं
छोड़ जगत जंजाल मैं बस तेरी हो जाऊं
नहीं लुभाती दुनियादारी, व्यर्थ है घर संसार
तू ही है इक सच्चा मोहन, बाकी सब बेकार
पाना है तुझको बता दे, किस विध तूझको पाऊं
झूठे है ये रिश्ते नाते, मोह माया के धागे
तेरा मेरा करते करते, जीवन सरपट भागे
तुझ संग प्रीत निभानी बोलो कैसे प्रभु निभाऊं
देखूं तो बस तुझको देखूं, सोचूं तो बस तुझको
तेरी ही होकर रह जाऊं, ऐसी गति दे मुझको
अंत समय बाहों में तेरी, गहरी नींद समाऊं
गायिका एवं रचना रंजना गुंजन
संगीत सकल देव साहनी
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