
कैसा बदल रहा है,
संसार देखिए,
है झूठ से भरा हुआ,
अखबार देखिए।।
देखा उन्हें जो गौर से,
नफरत सी हो गई,
किसने कहा था झांककर,
उस पार देखिए,
हर आईने में आयेगी,
सच्चाई नज़र फिर,
फिर एक बार नहीं चाहे,
सौ बार देखिए,
कहने को हो रही है,
सबकी सुनाइयाँ,
बेबस के लिए बंद है,
दरबार देखिए,
कैसे कहे की हमको कोई,
अच्छा नहीं मिला,
एक बार जरा गौर से,
सरकार देखिए,
‘अंकुश’ बुरे समय में,
कोई देखता नहीं है,
है मतलबी यहाँ पर,
ये परिवार देखिए,
स्वर – श्री अंकुश जी महाराज।
प्रेषक – ओमप्रकाश पांचाल उज्जैन मध्य प्रदेश।
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