
कैसे करूँ धन्यवाद मावड़ी,
तूने इतना दिया है,
मुझे प्यार मावड़ी,
तर्ज – किसने किया श्रृंगार मावड़ी।
सोचा ना समझा था मैंने,
दर दर की मैंने ठोकर खाई,
तूने थाम लिया है,
मैं तो तेरी हुई हूँ,
कर्ज़दार मावड़ी,
अपनों के तानो को सुनकर,
मैं तो टूट गई थी,
हार गई थी बिखर गई थी,
खुद से रूठ गई थी,
फिर तूने लिया है,
सम्भाल मावड़ी,
‘गंगा’ ने जिस दिन से तुझको,
अपना मान लिया है,
अपना सारा जीवन तेरे,
चरणों में सौंप दिया है,
यूँ ही सिर पे तू रखना,
अपना हाथ मावड़ी,
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