
कैसे मैं कह दूं रे जी घबराता है श्याम
Kaise Main Kah Duun Re Ji Ghabaraata Hai lyrics
कैसे मैं कह दूं रे, जी घबराता है,
साथ ही मेरे रहता है रे,
दानी दाता है,
मुझसे ये सपने में,
लाड़ लड़ाता है,
तर्ज – तुझको ना देखूं तो।
चांद और सितारे, जग में हैं न्यारे,
बाबा को लगते, ये भी तो प्यारे,
ये भी निहारे, खाटू नगरिया,
जाने है इन की, मन की सांवरिया,
जिसको ही, चाहे यो, दर्शन पाता है,
फूल और बहारें, देखो रे सारे,
कितने हैं सुन्दर, इनके नज़ारे,
कैसे वो देखें, बन गए जो भगवन,
रहते वो खुद में, हरदम यहां मगन,
ऐसो का, बाबा से,
झूठा नाता है,
होती ना मुश्किल, रहती ना उलझन,
कहां है उदासी, रहता हूं बन-ठन,
जब भी बुलाये, मुझको ये खाटू,
करता है मुझपे, ऐसा ये जादू,
फिर ‘जालान’ भजनों से,
इसे रिझाता है,
गायक – किशन मुद्गल।
– भजन लेखक एवं प्रेषक –
पवन जालान जी।
भिवानी (हरियाणा)
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