
खाटू से चलकर आज मेरे घर आये लखदातार
खाटू से चलकर आज मेरे घर,
आये लखदातार,
कृपा बरसाए रहे,
तर्ज – खाटू वाले हमें बुलाले।
श्याम प्रभु का घर है ये,
श्याम ही इसके मालिक है,
हम तो निर्भय रहते है,
श्याम हमारा रक्षक है,
श्याम चरण में ही बैठा है,
अपना ये परिवार,
आज सराहूं किस्मत को,
श्याम धणी घर आये है,
मेरे घर के आँगन में,
ये दरबार लगाए है,
कितना प्यारा रूप है इनका,
सुन्दर है श्रृंगार,
प्रेमी जन का जमघट है,
भाव भरा सबके दिल में,
श्याम प्रभु के दीवाने,
झूम रहे सब मस्ती में,
जगमग जगमग ज्योत जल रही,
हो रही जय जयकार,
जो भी ज़रूरत होती है,
श्याम ही पूरी करते है,
नई नई सौगातों से,
सबकी झोली भरते है,
‘बिन्नू’ सारे जग में इनकी,
महिमा अपरम्पार,
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