
गजरों लायो जी सांवरिया गजरों करो
गजरों लायो जी सांवरिया,
गजरों करो म्हारो स्वीकार,
गजरो ल्यायो जी,
ऐसो गजरो कदे कदे बने,
या में रंग हज़ार,
या गजरे में भात भात के,
मैने फूल सजाए हैं,
चंपा संग चमेली महके,
गेंदा और गुलनार,
सदाबहार रहे यो गजरो,
फूल कदे ना मुरझावे,
क्योकि इस गजरे में महके,
सब भक्ता का प्यार,
जो भी देखे इस गजरो को,
बस देखता ही रह जाए,
इसे पहन के लाखो में एक,
लागे लखदातार,
‘लख्खा’ फूल नही हैं इसमे,
मन भक्ता के पिरोए हैं,
गले सजाले इसको बाबा,
साँवरिया सरकार,
गायक – लख्खा जी।
प्रेषक – दीपक पाटीदार।
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