
आओ गजानंद प्यारा,
बेगा पधारो गणपति जी,
दुन्दाला, सुंडाला,
गजानंन बेगा आओ,
साथ रिद्धि सिद्धि ने ल्याओं,
गजानन्द बेगा आओं,
शुभ लाभ थे सबने बाँटों,
भंडारा में थाके काहे को घाटो,
सबसे पहले थाने मनावा गणपति जी,
महिमा निराली देवा थाकि गजानंद,
रिद्धि सिद्धि पति पूर्ण ब्रम्हानंद,
मोदक को थे भोग लगाओ गणपति जी,
माता पिता छे थाका गौरी शंकर,
ज्यां का गला में सोहे नाग भयंकर,
गंगा ज्यांके सर पे विराजे गणपति जी,
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