
गजानन्द को एक स्वर से पुकारो, करो सिद्ध बेगा सा, कारज हमारो ।। टेर।।
तर्ज – तुम्हीं मेरे मन्दिर तुम्हीं मेरी पूज्यां ।
वो गिरिजा के लाल ही, मंगल करेंगे, छलाछल वो भण्डार, तेरा भरेंगे, है साथी तेरो रणथंभौर वारो।
करो सिद्ध बेगा सा, कारज हमारो ।।
१ ।।
वो रिद्धि-सिद्धि के दाता, वो कल्याणकारी, वो मूसे की करता, सदा से सवारी, तेरो कष्ट मेटैंगो, सारो को सारो।
२ ।।
प्रथम उसकी पूजा, प्रथम उसका वन्दन, मलयागिरि उसके, लगाओ जो चन्दन, तो निश्चय करैगो, वो मंगल तिहारो।
३ ।।
वही श्यामबहादुर है, ‘शिव’ के संगाथी, गजानन्द को मेरी, सुरतां मनाती, करै याद बैंकी, यो मनड़ो बिचारो।
४ ।।
लिरिक्स – शिव चरण जी भीमराजका
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