
गणपति अपने गाँव चले,
कैसे हमको चैन पड़े।।
गणपति बप्पा मोरया,
पूढच्या वर्षी लवकर या,
मोरया रे, बप्पा मोरया रे,
जिसने जो माँगा उसने वो पाया,
रस्ते पे है सब लोग खड़े,
गणपति बप्पा दुख हरता,
दुख हरता भाई सुख करता,
किसी को कुछ वरदान दिया,
किसी को कोई ज्ञान दिया,
चले सभी को खुश करके,
खाली खाली झोलियों को भरके,
आएँगे साल के बाद इधर,
लोग करेंगे याद मगर,
थोड़े ही दिन रहे,
थोड़े दिनों में करके चले वो कम बड़े,
दस दिन घर में आन रहे,
भक्तो के मेहमान रहे
सारे शहर में धूम मची,
जोश से जनता झूम उठी,
उनको प्यारे सब इंसान,
राजा रंक हैं एक समान,
सारे घर उनके घर है,
उनको एक बराबर है,
उँचे महल अमीरो के हो या,
हम ग़रीबन के झोपड़े,
मस्त पवन ये पुरवाई,
मौजो की नैया लाई,
गणपति जी उस पार चले,
लेकर सबका प्यार चले,
सफल हुई सबकी पूजा,
ऐसा ना कोई बिन दूजा,
घटा गगन पर लहराई,
घड़ी विसर्जन की आई,
भूल चूक हो माफ़ हमारी,
हम सब हैं नादान बड़े,
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