
करे मुशक सवारी मेरे घर आना,
गणपति जी गजानन जी भक्तो की लाज रखना,
अंधे को आँख दे कोड़ी को काया,
बनजन को पुत्र दे निर्धन को माया,
दुःख हरता है तू सुख करता है तू रिद्धि सीधी भुधि का विधयता है,
सब देवो में होती तेरी प्रथम वन्दना,
हे गोरी लाला जगत प्रतिपाला तू ही भक्तो का है रखवाला,
विनती करलो स्वीकार हरलो भगतो का भार,
विघन हरता तू विधनो का नाश करना,
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