
गणपति पधारो ताता थैया करते,
ताता थैया करते ।
ठुमक ठुमक पग धरते,
आप के पधारने से,
बिगड़े काम संवरते ।
मोरेया रे बप्पा मोरेया रे ।
केवड़ा गुलाब जल से,
खूब धोया आंगणा ।
चन्दन की चौकी ऊपर,
मखमल का बिछावना ।।
पार्वती लाला आकर,
आसन लगाइये ।
रिद्धि और सिद्धि को भी,
संग लेकर आइये ।।
होके प्रसन्न विध्न,
आप ही तो हरते ।
गणपति पधारों,
वक्रतुण्ड है गजाननन है,
शिव के दुलारे लाल ।
शीश पे सुन्दर मुकुट विराजे,
गल मोतियन की माल ।।
एक दन्त चार भुज है,
केसर तिलक है ढ़ाल ।
मूसे की सवारी,
वेश अद्भुत है विशाल ।।
दयावान हाथो से तेरे,
माणक मोती झरते ।
आओ गणराज कहाँ,
सूरत छिपा ली है ।
पान पुष्प मेवा लाये,
लडुवन की थाली है ।।
भक्तो की विनती प्रभु,
कभी नहीं टाली है ।
कमल सरल ने प्रीत,
आपसे लगा ली है ।।
अन्न धन के भंडार हो देवा,
लख्खा के हो भरते ।
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