
गणपत रिद्धिया सिद्धिया,
लाइजो जी,
भगता के घर आज गजानंद,
बेगा आइजो जी।।
गऊ गोबर से आंगणो लिपावा,
ऊँची दिरावा गादी,
मोतिया जड़ीयो पाट पीताम्बर,
बैठो आप जो गादी,
गणपत अगवाणी बिराजो जी,
घी शक्कर दही शहद मिलावा,
दुधा करा संपाडो़,
कंकु केसर फुल चढावा,
दुधा गाय दुहाडो़,
थे रूस रूस भोग लगावो जी,
सिदुंरिया आंगी पर सोहे,
गले गुलाब की माला,
शीश मुकुट कुडंलिया काना,
पीताम्बर दुशाला,
आँगण पगलिया थे मडंवाजो जी,
दुदांला सुडांला गजानंद,
विघ्न विनाशक देवा,
सुर तैतीसा आगंले,
थाकी प्रथम सेवा,
भगति भैरव ने भर दिजो जी,
गायक – जगदीश वैष्णव जी।
प्रेषक – लहरी लाल मोयणा।
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