
गलती तेरी है सरकार, फागण दिखा दियो एक बार...
गलती तेरी है,अब फागण में नही बुलावे, हो जा सी टकरार...
गलती तेरी है ।।
तर्ज – धमाल ।
अगर फागण देखियो नही होतो, यो मनडो नही ललचातो,क्या ताई तेरे पाछे पड़ता, क्यों करता मनुहार...
गलती तेरी है,गलती तेरी है सरकार, फागण दिखा दियो एक बार...
श्याम धणी अब सोच समज ले, चाले न तेरी मन मानी,थोड़ी लाज शर्म तो बुलावो, भेज दे अब की बार...
अब यो फागण रहो न थारो, फागण हो गया भगता को,तै तो बेठ्यो बेठ्यो बाबा, लगा तेरा दरबार...
‘बनवारी’ थाणे हर फागण को, देनो पड़े बुलावो जी,थारी इक गलती से बाबा, हो गया में हकदार...
लेखक – जय शंकर चौधरी जी
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