
गाँव पाचला बाईसा रो देवरो ओ माँ भटियाणी
गाँव पाचला बाईसा रो,
देवरो ओ माँ,
माँ भटियाणी जी परचा,
देवे मोकला,
शैतान सिंह जी सपनो,
एक दिन आवियो ओ जी,
शैतान सिंह जी ने सपनो,
माँ भटियाणी सपना में,
दर्शन देवीया,
हुक्म होयो मै आवुली,
वेला आरती री जी,
कोई साथ भरन ने लावो,
थोडा़ आदमी,
वैशाख सुद तेरस,
तडके री आरती ओ माँ,
कोई धरती फाटी आधे,
चमकी बिजली,
सात पाताल फोड़,
बाईसा आविया ओ जी,
कोई नाग देवता गौमुख,
साथ आविया,
प्रगट हुई भटियाणी जी री,
मूर्ति ओ माँ,
माँ आँखीया माते पट्टी,
बांध्या आय जी,
राजपूत अब चार जणा,
ए आविया ओ जी,
माँ वनरी कन्या चार,
माँ वारी कन्या चार,
साथ मे लाविया,
राजपूत ओर कन्या,
पाटी खोल दी ओ माँ,
कोई पाँच किला री,
मूरत लागे सोवनी,
लोग हजारो परचो,
देखन आविया ओ जी,
माँ हुक्म दियो जागन रो,
आयी मावडी,
पाँच किलो वा दूध,
दियो है गावडी ओ जी,
दियो गौ मावडी ओ जी,
भगतो रे चाय बनी है,
सारी रातडी,
मेलो लागन लागो,
माँ रे देवरे ओ जी,
कोई उजली तेरस,
ओर बीज रो,
और बीज है चांदनी,
भगता रे बंधवाया,
माता पालना ओ जी,
कोई गूंगा बोल्या आंधा,
पाई आँखडी,
सवाई सिंह जी मूरत,
रूप पधारीया ओ जी,
दुखीया रा दुखडा,
आप मिटाया बावजी,
कई दिन सवाई सिंह जी,
अटेे बिराजीया ओ जी,
फिर आप सिधाया,
आलोप हो गई मूर्ति,
गायक – श्याम पालीवाल जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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