
गुरूजी बिना सुतो ने कुण जगावे,
मनखो जन्म मल्यो मुश्किल से,
अरे फेर हाथ नही आवे,
आयोड़ो अवसर भूल मती मूर्खा,
ऐ फेर चौरासी मे जावे,
असंख जुगो रो भूलो मारो जीवड़ो,
असंख जुगो रो भूलो मारे हंसलो,
फिर फिर गोता खावे,
लख चौरासी मे घट घणेरा,
महाकष्ट दुख पावे,
कूकर्म करे विधि नही सुजे,
मार जमो ने वाली खावे,
मकड़ी मुख से तार निकाले,
उसका जाल बनावे,
आप ही जाय जाल मे बेठे,
उलझ उलझ मर जावे,
शंकरनाथ मिल्या गुरू पूरा,
भिन भिन कह समझावे,
रूपाराम सतगुरू रे चरणे,
हर पूरबला पावे,
गायक – सुरेश लोहार।
प्रेषक – पुखराज पटेल बांटा
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