
गुरूसा बिना कौन प्रेम जल पावे,
कूपो रा नीर किणी विध सूखे,
सीर सायर सू आवे,
गुरूजी बिन कौन प्रेम जल पावे।।
कर्मो री जहाजों दो प्रकाशा,
शुभ अशुभ कहावे,
अशुभ कर्म ने दूर हटावे,
शुध्दि बुध्दि घर में लावे,
म्हारा गुरूसा चन्नण सरूपी,
फूल वासना लेवे,
लिपटयोड़ा बासँग मगन हो बैठा,
चन्नण छोड़ नहीं जावे,
म्हारा गुरूसा भँवर सरूपी,
कीट पकड़ घर लावे,
दे घरणाटो शब्द सुणावै,
होय भँवर उड़ जावे,
दूध माही घृत मेहंदी,
माहू लाली ज्ञान गुरूसा सू आवे,
कहत कबीर सा सुणो भाई साधो,
भाग पुरबला पावे,
प्रेषक – रामेश्वर लाल पँवार।
आकाशवाणी सिंगर।
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