
गौरी सुत गणराज गजानन,
विघ्न हरण मंगल कारी,
जो नर तुमको प्रथम मनावे,
दुविधा मिट जावे सारी,
तर्ज – फूल तुम्हे भेजा है।
प्रथम पूज्यनिय तू है बाबा तेरा,
सबसे पहले ध्यान किया,
बाधाओं से मुक्ति पाने,
तेरा ही आह्वान किया,
आओ सवारो काज हमारे,
बल बुद्धि के भंडारी,
शिव शंकर के लाल पधारो,
आज हमारे कीर्तन में,
आकर पूरी कर देना प्रभु,
जो भी आशा है मन में,
तेरे स्वागत की कर ली है,
हमने सारी तैयारी,
रिद्धि सिद्धि को भी संग में लाना,
गौरीपुत्र गणेश मेरे,
भर देना भंडार हमारे,
बिगड़े काम बने मेरे,
रखना हरी भरी प्रभु तुम हरदम ,
भक्तों की ये फुलवारी,
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