
घणा दिन सो लियो रे भाईडा,
अब जाग सके तो जाग,
घणा दिन सो रयो रे मनवा,
जाग सके तो जाग।।
अरे पेलो सोयो माँ री गर्भ में,
उल्टा पाव पसार,
कोल कियो हरी भजन को,
कृपा करी किरतार,
जनम थारो हो रयो रे मनवा,
दूजो सोयो सोना रा पालने,
माता थाने हुलराय,
अरे दूजो सोयो सोना रा पालने,
माता घणो हुलराय,
दुध कटोरा भर भर पी रयो,
सखीया मंगल गाय,
ए लाड थारो हो रयो रे मनवा,
तीजो सोयो तिरीया री सेज,
गल बीच बैया डाल,
अरे तीजो सोयो तिरीया री सेज,
अरे राम भजन तू भूल गयो रे,
सुख में दिन बिताय,
राम भजन अब भूल गयो रे,
मनवा जाग सके तो,
चौथो सोयो शमशान में,
लंबा पाव पसार,
अरे चौथो सोयो शमशान में,
कहत कबीर सुनो भई साधु,
अरे प्रभु नही आयो याद,
मरन थारो हो रयो रे,
मनवा जाग सके तो जाग,
गायक – शंकर जी टाक।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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