
घर में हमारे कान्हां एक बार आ जाओ,
दो पल के लिए ही सही एक बार आ जाओ,
पलकों पे रखेंगे दिल में बिठाएंगे,
स्वागत में तुम्हारे खुद को बिछाएंगे,
मेहमान नवाज़ी हमारी स्वीकारने आ जाओ,
रोटी बिना घी की है साग सरसों का,
इसमें मिलाया है प्रभु प्यार बरसों का,
कुटिया को धन्य बनाने सरकार आ जाओ,
शबरी के झूठे बेर आए थें तुम खानें,
मीरा से जो था प्रेम आये थे निभाने,
हम भी हैं प्रेम दीवाने एक बार आ जाओ,
ये प्रेम निवेदन है स्वीकार करो कान्हाँ,
मोहित कहे हमपे उपकार करो कान्हाँ,
भक्तों का मान रखने सरकार आ जाओं,
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