
चल माता के दरबार
हम उसे मनायेगे कुछ फूल चड़ायेगे
वो शिव पटरानी है वो वैष्णो रानी है
वो शेरोवाली है वो भोली भाली है
वो अपने बचो की करती रखवाली है,
डोली में बेठा कर हम उसको घर लायेगे
है जिसकी ज्योति से सारी दुनिया रोशन
अब तरस जीवन में जो बरसादे सावन
शरदा के फूलो में हम उसे झुलायेगे
सब उसको प्यारे है नैनो के तारे है
उनपर भी रहम करती जो जीवन हारे है
उन चरणों में बेहती गंगा में न्हायेगे
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