
चाहे वृंदावन हमसे दूर है,
पर हमको जाना तो जरूर है,
जिनसे मिलने को अखियां तरसी है,
जिनसे मिलने को बरसो बरसी है,
वो कान्हा का प्यारा सा रूप है,
वृंदावन जाना तो जरूर है,
चाहे बनवारी हमसे दूर है,
मुझको कान्हा का बुलावा आया है,
तब ही मन को वृंदावन भाया है,
ऊंची नीची डगर मशहूर है,
बांके बिहारी हमसे दूर है,
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