
थारी मोह माया ने छोड़,
राम ने भज रे ।
थारी उमर बीती जाय,
क्रोध ने तज रे ।
थारी उगमग चाले नांव,
चोला ने लज रे ।
तेरे सिर पर घूमे काल,
अगाड़ी सज रे ।
थारे गोड़ा दियो जबाब,
कमर गई लूल रे ।
तेरी आख्यां सूं दिखे नाय,
कान गया रुज रे ।
थारी परणी छोड़यो प्यार,
कदर नही कर रे ।
तेरा बेटा बोले बोल,
मरेलो कद रे ।
कह गया दास कबीर,
गुदड़ा लद रे ।
थारो लेखो लेसी राम,
मरेलो जद रे ।
एक बार भजन कर ले
मुक्ति का जतन कर ले
कट जायेंगे चौरासी
हरि का सुमिरन कर ले
चोला ये मनुष्य तन का
हर बार नहीं मिलता
जो गिर गया डाली से
वो फूल नहीं खिलता
तन मन को चमन कर ले
ना व्यथा गवा दे तू
ये साँसों की लड़ियाँ
अनमोल रत्न हैं ये
तेरे जीवन की घड़ियाँ
मैं अपने राम को रिझाऊं,
राम को रिझाऊं ।
अपने श्याम को रिझाऊं,
डाली छेड़ू न पत्ता छेड़ू,
ना कोई जिव सताऊं ।
पात पात में प्रभु बसत है,
वाही को शीश नवाऊँ ।।
गंगा ने जाऊ जमुना ने जाऊ,
ना कोई तीरथ नहाऊं ।
अडसठ तीरथ घट के भीतर,
तिन्ही में मलके नहाऊं ।।
ओषधि खाऊं ना बूटी लाऊँ,
ना कोई वैध बुलाऊँ ।
पूर्ण वैध अविनासी,
वाही को नबज दिखाऊं ।।
ज्ञान कुठारा कस कर बाँधू,
सूरत कमान चढ़ाऊँ ।
पांच चोर बसे घट भीतर,
तिनको मार गिराऊं ।।
योगी होऊं न जटा बढ़ाऊ,
ना अंग विभूत रमाऊँ ।
जेहि का रंग रंगे विधाता,
और क्या रंग चढ़ाऊँ ।।
चंद्र सूर्ये दोऊ समकार राख्यो,
निजमन सेज बिछाऊं ।
कहत कबीर सुनो भाई साधो,
आवागमन मिटाऊं ।।
दुनियाँ पैसों की पुजारी,
पूजा करते नर और नारी ।
जग में पाप कमाते भारी,
माया पैसों की , माया पैसों की ।।
पैसा माँ बाप को प्यारा,
नहीं तो बेटा लगता खारा ।
कहते हैं ये तो आवारा,
पैसा पास तो पत्नी राजी,
नहीं तो ताना भारी देती ।
मैं तो मायके में खुश रहती,
पैसा देश विदेश घुमावे,
नहीं तो गळियों में गोता खावे ।
उसको पागल कह बतलावे,
पैसा बूढ़ों की शादी करावे,
पैसा ही कन्या बिकवावे ।
नहीं तो कंवारा रह जावे,
पैसा धरम तीरथ करावे,
पैसा पूजा पाठ करावे ।
नहीं तो पापी कह बतलावे,
सुणजो रे संसारी लोगो,
ऐड़ो जमानो आवेला।
राजारामजी कहे मेरे बंदव,
कर्म धर्म मिट जावेला ।।
एक सेर रो धान बिकेला,
पानी टांक तुलेला ।
भूमि बीज उपज तज देसी,
इंद्र नही बरसावेला ।।
मनको बढ़ जासी ज्यादा,
धान हाथ नही आवेला ।
एक रोटी रे कारण लड़ कर,
अपनो पराण गवावेला ।।
दान पुण्य में धयान न धरसी,
पाप गानों बढ़ जावेला ।
देवा ने पूजे नही पापी,
ईस्वर ने नही धावेला ।।
राजा खुद तो राज तजसी,
जागीरी सब जावेला ।
पूंजी पति तो एक पलक में,
निर्धनिया हो जावेला ।।
भाई ने भाई नही जाने,
एक नार नही रेवेला ।
थारी मारी करता करता,
यु लड़ता मर जावेला ।।
सासरिया रे सिरो लापसी ,
उजली खीर रंदावेला ।
काका बाबा ओर मात पिता ने ,
गाली देन भगावेला ।।
बेटो बाप रो कयो नई माने,
अकड़ तनो अकड़ावेला ।
बुढ़िया में अकल नही है,
पागल के बतलावेला ।।
नेम धर्म सगळो तज देसी,
सब दिन पैसा कमावेला ।
ईस्वर ने ईस्वर नही जाने,
आप भृमा बन जावेला ।।
टाबर ने रोटी नही मिलसी,
सब दिन सोर मचावेला ।
भूका मिरता फिरे भटकता,
महामारी ओर हैजो पड़सी,
हाहाकार मच जावेला ।
काली माता तो चक्कर सलावे,
भेरू डमरू बजावेला ।।
सासुजी तो गठी फेरे,
सुसरो पानी लावेला।
ढोलिये बेठोडी बनड़ी,
आख्या सु डरावेला ।।
जात पात री रीत न रेसी,
एक जात बन जावेला ।
राजारामजी कहे मेरे बांधव,
कर्म धर्म हठ जावेला ।।
बस बात जरासी ।
होसी लिखी तकदीर ।।
लिखी करम की कैयां टलसी,
तेरो जोर कठे ताई चलसी ।
दुरमत करयां रे घणो जी बलसी,
दुरमत छोड़ो मेरा बीर ।।
क्यूँ धन की खातिर भागे,
किस्मत तेरे सागे सागे ।
तूँ सोवे तो भी या जागे,
थ्यावस ले मेरा बीर ।।
तेरो मन चोखी खाने पर,
छाप लगी दाने दाने पर ।
मिल जासी मौको आने पर,
जिस रे दाने मे तेरो सीर ।।
के चावे तू चोखा संगपन,
के चावे तूँ मान बड़प्पन ।
होवे एक विचारे छप्पन,
शंभु भजो रे रघुवीर ।।
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.

