
चोरी माखन की दे छोड़ कन्हैया
चोरी माखन की दे छोड़ कन्हीया मैं समझाऊँ तोय,
एक लाख गैया नन्द बाबा की नित नित माखन होय ।
बड़ो नाम है नन्द बाबा का हंसी हमारी होय ।।
बरसाने से तेरी आई रे सगाई रोज बतक्नी होए ।
बड़े घरन की राधा पबेटी ना ही बनेगी तोय ।।
चाहे माता मोहे मारो पीटो चाहे धमकाओ मोय ।
चोरी की मोहे आदत पड़ी है शादी होय न होय ।।
ले लठियां यशोदा दोडी कान्हा मारण तोहे ।
सूरदास सलोनी सूरत दिए नैन भर आये ।।
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