
छोड़ दे मनवा मन मस्ती चेतावनी
छोड़ दे मनवा मन मस्ती ।
सोहन शिखर गढ़ है बस्ती ।।
इड़ा पिंगला अरदंग नारी ,
चाँद सूरज घर रह लगती ।
गंगा जमुना बहे सरस्वती ,
स्वास स्वास की वही गिनती ।।
अष्ट कमल में अलख विराजे ,
रंग महल में रह सगती ।
चौबारा में दीपक जलता ,
वहा सुरता रहे जगती ।।
हिये उतार हाथ धर लेणा ,
शीश उतार चले कुश्ती ।
पांच तत्व गुण तीनू भेला ,
राखो जबर घणी है जब्ती ।।
इसी नगर में डंका लागे ,
साध सुणेला कोई विरला सती ।
झालर शंख पखावज बाजे ,
जिण बिच केलि करे हस्ती ।।
गोरखनाथग मुक्ति के दाता ,
पल पल सिमरे पाव रती ।
शरणे मछँदर गोरख बोले ,
अलख लख्या सो खरा जती ।।
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.


