
जगदम्बा के दीवानो को,
दरश चाहिए, दरश चाहिए,
हमें माँ तेरी एक,
झलक चाहिए, झलक चाहिए।।
तर्ज – दीवाने है दीवानो को।
दया और ममता का मंदिर है तू,
तुझे क्या पता कितनी सूंदर है तू,
गुलाबों के माँ जैसा मन है तेरा,
हमे माँ तेरे जैसा मन चाहिए,
तेरा रूप सबसे सुहाना लगे,
बिना भक्ति के जी कही ना लगे,
माँ भक्ति में तेरे हम डूबे रहे,
हमें ऐसा तुझसे माँ वर चाहिए,
कई दैत्य तुमने पछाड़े है माँ,
तेरा शेर रण में दहाड़े है माँ,
तू काली नवदुर्गा तू ज्वाला है माँ,
हमे माँ तेरी ही शरण चाहिए,
तू पर्वत तू नदियां तू धरती है माँ,
तू पाताल अम्बर सितारों में माँ,
तेरी इन भुजाओं में सृष्टि है माँ,
हमें इन भुजाओं का बल चाहिए,
स्वर – मुकेश बागड़ा जी।
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