
जग का करतार वो,
सब का भरतार वो,
तू उसे भूल जाने की,
कोशिश ना कर,
रात सोते हुए,
सुबह होते हुए,
मन सदा याद रखने,
की कोशिश तो कर,
तर्ज – मैं तेरे इश्क़ में।
वो ही निर्माण करता जहाँ का,
प्रभु अजब कारीगर है यहाँ का,
दिल में अचरज हुआ ये जानकर,
अन्न दाता है वो,
जग विधाता है वो,
कुछ तो अहसास कर तू ऐ राही,
चार दिन जिंदगी अंत जाहि,
करले तू अब भजन,
मिला मानव का तन,
जो भी आए यहाँ,
वो गए है वहां,
तू गलत राह जाने की,
गायक – संगीत पांडेय प्रयागराज।
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