
( दुखियों के सब दुःख हर लेते हैं,
भस्म लपेटे रहते हैं,
कष्ट उन्हें क्या जो भोले की,
शरण में हरपल रहते हैं॥ )
जटा में तेरी गंगा विराजे, माथे चन्द्र सजाया,
सावन में जब डमरू बाजे, तीनो लोक सुहाया,
आया सावन आया, भोले का सावन आया,
आया सावन आया, बाबा का सावन आया
तेरी महिमा हम क्या बताएं, मंदिर खुद हैं बताते,
मानव क्या सावन में तुझसे, देव भी मिलने आते |
हम हैं दुखारी हम क्या लाये, बेलपत्र है लाया,
मैया पार्वती है शक्ति, विघ्न के हर्ता गणेश,
सेनापति हो मुरगन जैसा, फिर कैसे हो कलेश
यही सोंचकर सुन मेरे दाता, याचक दर पर आया,
छटा अनूपम है सावन की, कांवरिया हैं बताते,
लेकिन जब तक तू न चाहे, हम तो नही जा पाते
भाग्य देख संयोग का बाबा, तेरे रंग में नहाया,
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