
जपले कृष्ण कन्हैया
तू जपले कृष्ण कन्हैया,
तेरा लगना नही रुपिया॥
लगना नही रुपिया,
जो जपता उसको फल मिलता,
उसका तो खोता सिका चलता॥
पार करोगे ।॥,नहिया,
मीरा पी गई विष का प्याला,
उसका विष अमृत कर डाला॥
वो नाची ।॥,था था थिया,
द्रोपदी ने जब नाम थैया,
श्याम ने आकर चीर बढाया॥
उसकी ऐसे ।॥,लाज बचाआये,
श्याम सुन्दर बनकर मतवाला,
रटता है हरी नाम की माला॥
पढ़ो श्याम के ॥, पएया,
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