
जबरा जंगल में बेठी आवरा,
जग जननी जनम सुधार,
राठोडा कुल मझधार लीनो अवतार,
मंदिर बनियों बीच पहाड़ में,
लागे सोभा आनंद अपार,
सामे सरवर लंबी पाल,
पिछवाड़े बाजार,
मैया शामे सरवर लंबी पाल,
शामे तो लागे मुरत शोवणी,
सुंदर पुष्पा रो सिंगार,
शाडी शुरंगी लछदार,
जडीया जर्क सीतार।।
शंख सेवा में विष्णु पुरीयो,
ब्रम्हा चारों वेद उचार,
धरेरे ध्यान त्रीपुरार,
थारे दरबार,
52 भेरु ने 64 जोगणिया,
निशदिन गावे मंगलाचार,
भगता री भीड़ अपार,
दुखीया दुखड़ा पल में मेटदो,
जननी दया दृष्टि धार,
मरता प्राणी रो प्राण उबार,
नैया डूबी जाए,
स्वर्ण मुकुट सोहे शीश पर,
केसर कुंकु तिलक ललाट,
चढ़े मिष्ठान भर भर थाल,
नाना परकार,
नहार फडुके बोले मोरिया,
बोले कोयल राग मल्हार,
शंख शहनाई बाजे द्वार,
झालर री झणकार,
भक्त बदरी राव को,
शिव शक्ति को आधार,
नाना शम्भू है बंसीलाल,
गावे है बारम्बार,
गायक – मोईनुद्दीन जी मनचला।
प्रेषक – रतन पुरी &कुलदीप मेनारिया
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