
जबसे गयो वृंदावन छोड़ श्याम संग ना खेली होली,
ना खेली होली कन्हैया संग ना खेली होली,
ना पहना मैंने माथे पर टीका ना किया कोई श्रंगार,
राह देख मेरी अखियां थक गई भूल गई घर बार,
ना पहले मैंने कानों में झुमके ना किया कोई श्रंगार,
ना पहनो मैंने गले में हरबा ना किया कोई श्रंगार,
ना पहने मैंने हाथों में कंगन ना किया कोई श्रंगार,
ना पहनी मैंने कमर में तगड़ी ना किया कोई श्रंगार,
ना पहनी मैंने पैरों में पायल ना किया कोई श्रंगार,
ना आओगी मैंने सर पर चुनरिया ना किया कोई श्रंगार,
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.
