
जबसे नजर तेरी पड़ गई है सांवरे पतंग मेरी उड़ गई है
जबसे नजर तेरी पड़ गई है,
सांवरे पतंग मेरी उड़ गई है।।
तर्ज – एक परदेसी।
पहले मैं उड़ाता था तो,
झट कट जाती थी,
ज्यादा देर आसमां में,
टिक नहीं पाती थी,
जबसे ये हाथों तेरे पड़ गई है,
नशा तेरे भजनो का,
कैसा मैं बताऊँ,
नींदो में सांवरे मैं,
तेरा गुण गाऊं,
जबसे खुमारी तेरी चढ़ गई है,
‘हर्ष’ की डोरी बाबा,
थामे यूँ ही रखना,
ढीली मत छोड़ देना,
कस के पकड़ना,
जबसे ये प्रीत तुमसे जुड़ गई है,
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