
जब खेलने होली लेकर टोली
वो छैल छबीलो,
रंग भरी पिचकारी साथ में लायो,
जब खेलने होली लेकर टोली,
बरसाने में आयो...
लाख करी कोशिश मुझे,
पर टच नहीं कर पायो वो,
बने सयाना बड़ा ही लेकिन,
रंग लगा नहीं पाया वो,
अपनी अंगुली पर मैंने तो,
कल उसको खूब नचायो,
फ़ैल हुआ एक प्लान जो उसका,
दूजी उसने चाल चली,
चुपके से पीछे से आकर,
मेरी बहियाँ थाम ली,
मेरी थाम के बहियाँ जुल्मी ने,
जी भर के रंग लगायो,
शोर शराबा धूम धड़ाका,
होली की हुड़दंग हुई होली के हुड़दंग में,
दोनों के नैनों की जंग हुई,
इस जंग में मैं तो हार गई,
वो जादू ऐसो चलायो,
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