
जब जब भी इसे पुकारा बाबा ने दिया सहारा
जब जब भी इसे पुकारा,
बाबा ने दिया सहारा,
ये दूर नही है हमसे,
बस याद करो इसे मन से,
कन्हैया तो हमारा साथी है,
गरीबो का सहारा है।।
तर्ज – कण कण में वास है जिसका।
हमसे दूर नही है,
करता है रखवाली,
जिसने किया भरोसा,
बाबा ने डोर संभाली,
जो इसके पाँव पकड़ले,
ये उसका हाथ पकड़ले,
आपने भक्त पे हमेशा,
दया किया करते है,
उसको पार लगाए,
जो नाम लिया करते है,
ये चार दिनों का जीवन,
बाबा को करदे अर्पण,
इसका साथ मिले तो,
हर मुश्किल टल जाए,
हो घनघोर अंधेरा,
मंजिल मिल ही जाए,
बिन पानी नांव चला दे,
‘बनवारी’ की बिगड़ी बना दे,
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