
जब भी रघुनाथ को पुकारेंगे
जानकी मात संग लाल लखन, और हनुमंत चले आयेंगे
मैने जिस क्षण उन्हें पुकारा था, पल में अपने ही संग पाया था
कितनी कृपा तुम्हारी मेरे प्रभु...
जग ये पूछे तो क्या बताएंगे...
मेरे रघुनाथ
वीर बजरंग का सहारा है, उनके दम पे ही तो गुजारा है
तेरे भजनों से अन्न पाता हु
वरना कैसे ये घर चलाएंगे...
जब भी रघुनाथ...
आप हो तो शरण मिली मुझको, हर कोई प्रेम की नजर करता है
क्या मिलेगा छुपाने से मुझको
तेरे भजनों को सदा गायेंगे
शुभम् सुमित (शर्मा ब्रदर्स)
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