
जयकारा बोलो प्यार से
जय कारा बोलो प्यार से
दोबरा बोलो प्यार से ।
दुनिया की खुशियां मिलती है
वाणी के दरबार से ।।
चन्दन की चौंकी पे
बैठी जगदम्बे महारानी,
दो नैनं में चाँद सूरज
मुखड़ा है नूरानी ।
पल में मैया बदले किस्मत
सुनकर के जयकार से,
लाल लाल है तन पे चोला
गल पुष्पों की माला,
जो भी माँ के रूप को देखे
हो जाए मतवाला ।
उस को सब कुछ मिल जाता है
मैया के भण्डार से,
कोई न इसको देख सके
पर वो सब को ही देखे,
पर देखे पीछे वो बैठी
लिखती सब के लेखे ।
श्याम ने कुछ पाया भगतो
मैया के उपकार से,
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