
जय कारे तू बोल भगता जय कारे तू बोल,
सुन रही है माँ मेरी अम्बे दिल के दुखड़े खोल,
तेरे द्वारे आके मैया जब से ज्योत जला ली,
तूने भी तो भर दी मईया मेरी झोली खाली,
दुःख की सुख की साथी तू है,
ये रिश्ता अनमोल,
ना सुनता था कोई मेरी दर्द मैं किसको सुनाऊ,
जब से जाना तू माँ मेरी रज रज दर्शन पाउ,
तूने जो उपकार किया है कसिए चुकाओ माँ मोल.
शूकर करू मैं मईया तेरा गीत ख़ुशी के गाउ,
सब की सुनले महरा वाली ये अरदास लगाउ,
सब की भूले माफ़ तू करती दवार दया के खोल.
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