
जय धरती माँ जय गौ माता,
गूंज रहा है मंत्र महान,
सुखद सुमंगल विश्व कामना,
जीव मात्र का हो कल्याण,
गौ की सेवा स्वयं प्रभु भी,
करके कहलाये गोपाल,
हल को धारे चले तपस्वी,
युग युग से धरती के लाल,
माँ सृष्टि से पावन नाता,
आनन्दित करते रसपान,
गौमय धरती ही देती है,
अमृत मय फसले भरपुर,
अमृत युक्त फसले भरपुर,
पंचद्रव्य की महिमा अनुपम,
रोग प्रदूषण होते दूर,
परम् सात्विक ऊर्जा शक्ति,
अविरत देता गौ विज्ञान,
गौ आधारित विकास रचना,
गाँव गाँव में विकसाये,
लघु उद्योग कृषि जैविक से,
हर्षित जीवन सरसाये,
भारत फिर से प्राप्त करेगा,
गौरवमय उन्नत स्थान,
गौ संरक्षण गौ संवर्धन,
है अनुप कर्तव्य पुनीत,
अभय धाम हो अभय ग्राम हो,
सभी के मन में गौ की प्रीत,
कोटि कोटि जीवन व्रत धारे,
पूर्ण सफल हो शुभ अभियान,
स्वर – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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