
जय रघुनंदन जय सियाराम,
बोले जा मन सुबहो शाम,
तेरे बन जाये बिगड़े सभी काम है,
बोलो जय श्रीराम बोलो जय श्रीराम।।
तर्ज – अब है नींद किसे।
एक थी कोई पत्थर की शिला,
जाने कब से पड़ी थी मन मार,
चरण कमल छूये नार बनाया,
प्रभु राम जी किये है उद्धार,
इनके चरणों मे ऐसी गजब बात है,
भक्त के दिल मे बसते मेरे राम है,
पार करा नदियाँ केवट कहे,
सुनो मेरी करुणानिधान,
नैया उतराई मुझे मोक्ष मिले,
प्रभु मधुर दिए मुस्कान,
रघुवर जी का ये ही तो अंदाज़ है,
शबरी बिचारी दर्शन की दुखारी,
प्रभु सुध लिए आ गये द्वार,
खाये झूठे बेर बने प्रेम के पुजारी,
दिया प्रेम का अनोखा उपहार,
दिल से कोमल हृदय में भरा प्यार है,
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