
जय वासुदेव तनये जग वंदन देवकी माता के दुख भंजन
दोहा – नील गगन सम सावरा तन कोमल सुकुमार
अरुण आधार मुख चंद्रमा नयन रसिक रत्ना
कर मुरली कटी कछिनी गले बैजन्यति माल
मोर मुकुट छवि शोभीनी जय यसुदा के लाल
जय यसुदा के लाल जय यसुदा के लाल
हारे मुरारी हारे मुरारी हारे मुरारी
जय वासुदेव तनये जग वंदन
देवकी माता के दुख भंजन
बाबा नंद के राज दुलारे
यशुमति मैया के ध्रुव तारे
केसर तिलक ललाट विराजे
कानन मे कुंडल आती छवि छाजे
लत घुघराली मुख पेर सोहे
मोतिन की लट तन मन मोहे
पीताम्बर श्यामल तन धरे
सुर नर मुनि सब ही को प्यारे
जय रघु नंदन जय जग वंदन
असुर निकंदन जय असुर निकंदन की जय
जय यशोदा नंदन की जय देवकी नंदन की जय
नटखट लालन की लड़काई अति ही अद्भुत वर्णी ना जाए
माटी खात कुंवर पकड़ाए मुख में तीनो लोक दिखाए
करके चोरी माखन खाये तबसे माखन चोर कहाये
सुघर सलोने मनोहर लाला हर ब्रज बाला
गोपियाँ संग तुम रास रचाये गोप से गोपी नाथ कहाये
जय काली देह नाग नथैया
जय जमुना के कष्ट हरैया
मामा कंश ही बैर बढ़ायो
भाति भाति के दैत्य पठायो
लीला करि कृष्णा ने न्यारी
पड़ी रक्षाशन को अति भरी
कपट पूतना का झट चीन्हा
पीयत दूध प्राण हर लेना
अधम अघसरू हनो मुरारी
बधो बका सुर चोंच विकारी
ऐसीवो मासुर को मारयो
पतित लम्बा सुर संहारो
मुर्दा नव दानव को शीश उडायो
कृष्णा मुरारी नाम कहायो
जेते कंस के राकस आयो
सब ही को परलोक पठाओ
अंत कंस को खींच पठायो
भरी सभ में प्राण निकालो
असुर संहार भये असुरारी
कुञ्ज बिहारी जग हित कारी
राधे श्री राधे घनश्याम करू मैं आरती सुबह शाम
राधे रानी – बृज 84 कोस यात्रा राधे राधे बरसाने वाली राधे
ओम जय श्री राधा जय श्री कृष्णा श्री राधा कृष्णाए नमः
आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की
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