
जय हो आद्यशक्ति जय माँ दुर्गा काली,
तीन लोक की माता तू है तीन लोक की दाता,
सबके कष्ट निवारण तू है तू ही भाग्य विधाता,
धरती तू है अम्बर तू है तू ही तारागण में,
जगत भगत में तू है दाती तू ही सबके मन में,
तू ही सहारा तू ही किनारा तू ही सबकी मंजिल,
तू ही मन मे तू ही तन में तू ही मंदिर जंगल,
जल में तू है थल में तू है तू ही नाव चलईया,
पीर समुंद्र तू है दाती सबकी पार लगईया,
पूर्व पश्चिम उत्तर दक्षिण तेरा रूप समाया,
दुर्गा तू है काली तू है तू ही योग माया,
तू ही शारदा तू ही वैष्णो तू ही काली शक्ति,
तू ही अराधना तू ही पालना तू ही कामना मन की,
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