
जहाँ डाल-डाल पर,
सोने की चिड़ियां करती है बसेरा ।
वो भारत देश है मेरा ।।
जहाँ सत्य, अहिंसा और धर्म का,
पग-पग लगता डेरा ।
जय भारती, जय भारती ।।
ये धरती वो जहाँ ऋषि मुनि,
जपते प्रभु नाम की माला,
(हरि ॐ, हरि ॐ, हरि ॐ, हरि ॐ)
जहाँ हर बालक एक मोहन है,
और राधा इक इक बाला ।।
जहाँ सूरज सबसे पहले आ कर,
डाले अपना फेरा ।
जहाँ गंगा जमुना क्रिश्न और,
कावेरी बहती जाये ।
जहाँ उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम,
को अम्रित पिलवाये ये अम्रित पिलवाये ।।
कहीं ये फल और फूल उगाये,
केसर कहीं बिखेरा ।
अलबेलों की इस धरती के,
त्योहार भी है अलबेले ।
कहीं दीवाली की जगमग है,
होली के कहीं मेले ।।
जहाँ राग रंग और हँसी खुशी का,
चारो और है घेरा ।
जहाँ आसमान से बाते करते,
मंदिर और शिवाले ।
किसी नगर मे किसी द्वार पर,
कोई न ताला डाले ।।
और प्रेम की बंसी जहाँ बजाता,
आये शाम सवेरा ।
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