
जाग रे नर ए जाग दिवाना,
दोहा – सुता सुता क्या करो,
सुता नी आवे नींद,
काल सराणे आय खडो,
ज्यु तोरण आयो बिन्द।
जाग नर ए जाग दिवाना,
अब तो मूर्ख जाग रे,
अरे कई सुतो घणगोर नींद में,
कई सुतो घणगोर नींद में,
अरे उठ भजन मे लाग रे,
जाग रें नर जाग दिवाना।।
ध्रुवजी जागे प्रहलाद जागा रे,
जैसे बन्दे जाग रे,
ए ध्रुवजी ने मिलगी असल फकीरी,
ध्रुवजी ने मिलगी असल फकीरी,
अरे प्रहलादे ने राज रे,
गोरख जागे मच्छंदर जागा रे,
ए जैसे मूर्ख जाग रे,
जैसे मूर्ख जाग रे,
ए वारो चेलो भरतरी जागो,
वारो चेलो भरतरी जागो,
अरे नगर उज्जैनी त्याग रे,
एक जागे रोगी भोगी,
के जागे कोई चोर रे,
के कोई जागे भगत राम रो,
अरे लागी राम से डोर रे,
तन सारा भई मन का रहना,
तन सारा भई मन का रहना रे,
दो दिन का विश्राम रे,
ए तन का चोला जद होया पुराना,
तन का चोला जद होया पुराना,
अरे लगा दाग पर दाग रे,
मीरा के प्रभु ऐसी जागी,
ए राम भजन मे लाग रे,
राम भजन मे लाग रे,
ए सतगुरु सेण दया कर दीनी,
सतगुरु सेण दया कर दीनी,
जन्म मरण सब जाव रे,
गायक – मोईनुद्दीन जी मनचला।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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