
जिन दिन हंसा जनमीया बाज्या सोवनीया थाल रे
जिन दिन हंसा जनमीया,
दोहा – नेनो रे रे नेनका,
नेनी धोरा री ध्रोव,
घास पुस उड जावसी,
जमी रेवे इन ठोर।
मर जासी रे मानवी,
तू क्यु करे अभिमान,
मरनो एक दिन आवसी,
जद प्रभु नही देसी सार,
तू भजले हरि रो नाम।
बाज्या सोवनीया थाल रे,
जीण दिन हंसा जनमीया,
सोने री सरीयु नारा मोडीया,
घर घर मंगला चार रे,
जोबनीयो जातो रयो,
आयी रे बुढापा री वार रे,
नखरालो जातो रयो ओ जी।।
अरे जनमीया ऊंडी ओरीया,
जद बाज्या सोवनीया थाल रे,
जनमीया ऊंडी ओरीया,
बुआ भतीजा हुलरावीया,
अरे पाँच वर्ष रा वेगीया,
दडीयो रमवा जाता रे,
पाँच वर्ष रा वेगीया,
नित रा लावे ओलबा,
माता वर्जन जावे रे,
अरे दस रे वर्ष रा वेगीया,
स्कूलों पढवा जाता रे,
दस रे वर्ष रा वेगीया,
मास्टर जी म्हाने करी पढाई,
डंडा मारीया चार रे,
अरे पन्द्रह वर्ष रा वेगीया,
करी सगायो री बात रे,
पन्द्रह वर्ष रा वेगीया,
लारे लुम्बाडी नार रे,
टाबर टूबर मोकला,
जीव पड्यो जनजाल रे,
अरे चालीस वर्ष रा वेगीया,
करता मन री बात रे,
चालीस वर्ष रा वेगीया,
हामी छुल्ले बैठता,
घी सु भरता थाल रे,
अरे जंतर पडीया जोदरा,
ढिला पडीया हाड़ रे,
जंतर पडीया जोदरा,
जाट रूपजी बोलीया,
रेजो वैकुण्ठा वास रे,
गायक – शंकर जी टाक।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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