
जिसने कलयुग में लिया अवतार है
जिसने कलयुग में लिया अवतार है,
वो शीश का दानी खाटू वाला श्याम है,
भक्तों के लिए वो हरदम तैयार है,
मेरा श्याम है, मेरा श्याम है,
तर्ज – कब तक चुप बैठे।
दरबार में इनके देखो,
जाते है नर और नारी,
सुनते है सबकी विनती,
मेरे बाबा शीश के दानी,
खाटू वाले से देखो,
रिश्ता है बहुत पुराना,
बचपन से फिरूं मैं देखो,
बनकर के इनका दीवाना,
मेरे श्याम धणी से मुझको मिला प्यार है,
बाबा के भरोसे ही तो,
चलता है ये परिवार,
‘नीरज’ की विनती सुनने,
को रहता है तैयार,
पहचान मेरी तो खाटू वाला श्याम है,
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