
जीने लगे हम, सर को उठाके,खाटू की माटी का, तिलक लगाके ।। टेर ।।
तर्ज – साथी हमारा कौन ।
धन्य खाटूकी माटी, विराजे श्याम देखो,और हारे का सहारा, है उसका नाम देखो,उसने हमको गले लगाया, रक्खा सर पे हाथ – २,रखता हमेशा, दुःखों से बचाके ।।
खाटू की...
१ ।।
गरीबी ने दबाया, कि सर को उठाते कैसे,फटे दामन में आपनी, लाज छुपाते कैसे,उसने हमको जग से बचाया, रक्खी मेरी लाज – २,सब कुछ दिया है, खाटू बुलाके ।।
२ ।।
इतना कोई ना करता, जितना इसने किया है,इतना कोई ना देता, जितना इसने दिया है,ना देखे दुनियां में ऐसा, श्याम सा लखदातार – २,लायक बनाया, अपना बनाके ।।
३ ।।
श्याम जन्मों जन्मों तक, तेरी गलियों से गुजरे,और माटी ‘बनवारी’, नहीं माथे से उतरे,तेरे हाथ से इस माटी का, तिलक लगादे श्याम – २,तिलक लगाना, जरासा जंचाके ।।
४ ।।
लिरिक्स – जयशंकर चौधरी जी
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