
जैल में प्रकटे कृष्ण कन्हैया जया किशोरी जी
जैल में प्रकटे कृष्ण कन्हैया,
सबको बहुत बधाई है,
बहुत बधाई है,
मात-पिता को सब समझाया,
मैं हू लीला करने आया,
जैसा कहु वैसा ही करना,
जगत भलाई है,
कैसा किया है जादू कमाल,
छोटे बन गये लड्डू गोपाल,
देखो अंगूठा चूसते,
मोहनी सूरत बनाई है,
बारिश पड़ रही मूसलाधार,
शेष नाग है सेवा दार,
यमूना जी की बाढ़,
ना जाने कहा समाई है,
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