
जैसे जैसे दर पे तेरे,
झुकता चला गया,
वैसे वैसे मैं तो ऊंचा,
उठता चला गया,
तर्ज – तेरा मेरा सांवरे ऐसा नाता।
देर से समझा तुझको मैं,
प्रभु ये भूल हुई मेरी,
सांवरे माथे पे अब तो धूल तेरी है,
जैसे जैसे भजनो में मैं,
रमता चला गया,
मैं तो मानु मेरी चिंता,
है हरदम तू ही तो करता,
मांगने से पहले मेरी,
श्याम तू झोली है भरता,
जैसे जैसे हारे के संग,
चलता चला गया,
जब भी कोई संकट आया,
तुझे हाजिर मैंने पाया,
‘हर्ष’ जीवन की खुशियों में,
तुझे शामिल मैंने पाया,
जैसे जैसे श्री चरणों में,
गिरता चला गया,
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